कंपन विश्लेषण (Vibration Analysis) का ह?

त्वरित जवाब

कंपन विश्लेषण घूमे वाला मशीनरी के यांत्रिक कंपन के माप आ व्याख्या करे के प्रक्रिया ह, ताकि बिना खोले-जोरले खराबी के पता लगावल जा सके। इस्तेमाल क के FFT (फास्ट फूरियर ट्रांसफॉर्म), जटिल कंपन सिग्नल के अलग-अलग फ्रीक्वेंसी घटक में बाँट दिहल जाला। हर खराबी एगो खास स्पेक्ट्रल "फिंगरप्रिंट" पैदा करेला: अनबैलेंस 1× RPM पर, मिसअलाइनमेंट 2× पर मिसअलाइनमेंट, कई हार्मोनिक्स के रूप में ढीलापन, गैर-सिंक्रोनस फ्रीक्वेंसी पर बेयरिंग के खराबी। यह Balanset-1A बैलेंसिंग आ स्पेक्ट्रम एनालिसिस दुनो एके पोर्टेबल इंस्ट्रूमेंट में करेला।

हर घूमे वाला मशीन कंपन करेला। स्वस्थ मशीन में, कंपन कम आ स्थिर होला — ओकर सामान्य "ऑपरेटिंग सिग्नेचर"। जइसे खराबी बढ़ेला, कंपन अनुमानित तरीका से बदलेला। एह बदलाव के मापके आ विश्लेषण करके, हमनी मूल कारण के पहचान कर सकीं, खराबी के भविष्यवाणी कर सकीं, आ भयानक टूट-फूट से पहिले मेंटेनेंस के योजना बना सकीं। ई नींव ह पूर्वानुमानित रखरखाव.

FFT: स्पेक्ट्रम एनालिसिस के मूल आधार

एगो कंपन सेंसर (एक्सेलेरोमीटर) यांत्रिक कंपन के बिजली सिग्नल में बदल देला। समय के साथ देखावल गइल एकरा के कहल जाला वेवफॉर्म — जब कई खराबी मौजूद रहेला त एगो जटिल, देखे में अस्त-व्यस्त वक्र। FFT (फास्ट फूरियर ट्रांसफॉर्म) एह जटिल सिग्नल के अलग-अलग साइनसॉइडल घटक में बाँट देला, जेकर अपन-अपन फ्रीक्वेंसी आ एम्प्लीट्यूड होला।

FFT के एगो प्रिज्म जइसन सोचीं जे सफेद रोशनी के इंद्रधनुष में बांटेला। जटिल वेवफॉर्म "सफेद रोशनी" ह — FFT भीतर छिपल अलग-अलग "रंग" (फ्रीक्वेंसी) के उजागर करेला। नतीजा ह कंपन स्पेक्ट्रम  — मुख्य डायग्नोस्टिक टूल।

रोटेशनल फ्रीक्वेंसी
f₁ₓ = RPM / 60   (Hz)
1× = शाफ्ट के घूर्णन फ्रीक्वेंसी — ई सगरी स्पेक्ट्रल विश्लेषण खातिर संदर्भ ह

मुख्य स्पेक्ट्रम पैरामीटर

  • फ्रीक्वेंसी (X-अक्ष, Hz): कंपन कतना बेर होला। सीधे स्रोत से जुड़ल। 1× = शाफ्ट के स्पीड। 2× = शाफ्ट के स्पीड के दुगुना।
  • एम्प्लीट्यूड (Y-अक्ष, mm/s RMS): हर फ्रीक्वेंसी पर कंपन के तीव्रता। ऊँच पीक = जादा ऊर्जा = जादा गंभीर स्थिति।
  • हार्मोनिक्स: मूल फ्रीक्वेंसी के पूर्णांक गुणज: 2× (दूसर), 3× (तीसर), 4×, आदि। इनकर मौजूदगी आ सापेक्ष ऊँचाई डायग्नोस्टिक जानकारी देला।
  • फेज (°): अलग-अलग माप बिंदु पर समय संबंध। अनबैलेंस (इन-फेज) आ मिसअलाइनमेंट (180°) में फर्क करे खातिर जरूरी।

कंपन माप के इकाई: डिस्प्लेसमेंट, वेलोसिटी, एक्सेलेरेशन

कंपन के तीन अलग भौतिक पैरामीटर के रूप में मापल जा सकेला। हर एक अलग फ्रीक्वेंसी रेंज पर जोर देला, जेकरा से ऊ अलग-अलग डायग्नोस्टिक काम खातिर उपयुक्त हो जाला। कब कवन पैरामीटर इस्तेमाल करे के बा ई समझल असरदार विश्लेषण के बुनियाद ह।

📏 डिस्प्लेसमेंट

µm (पीक-टू-पीक) या mil
सबसे बढ़िया रेंज: 1–100 Hz

मापेला कि केतना दूर सतह केतना हिलेला। कम फ्रीक्वेंसी पर जोर देला — धीमा-स्पीड मशीन, शाफ्ट ऑर्बिट विश्लेषण, आ जर्नल बेयरिंग पर प्रॉक्सिमिटी प्रोब खातिर आदर्श। 1 mil = 25.4 µm।

📈 वेलोसिटी

mm/s (RMS)
सबसे बढ़िया रेंज: 10–1000 Hz

मापेला कि केतना तेज सतह हिलेला। ई मानक पैरामीटर ISO 10816 के हिसाब से सामान्य मशीनरी निगरानी खातिर। समतल फ्रीक्वेंसी रिस्पांस अधिकतर खराबी के प्रकार के बराबर महत्व देला। Balanset-1A mm/s RMS में मापेला।

💥 एक्सेलेरेशन

m/s² या g (RMS/पीक)
सबसे बढ़िया रेंज: 500 Hz – 20 kHz

मापेला बल कंपन के। ऊंच फ्रीक्वेंसी पर जोर देला — शुरुआती बेयरिंग दोष, गियर मेश, आ इम्पैक्ट खातिर आदर्श। 1 g = 9.80665 m/s²। एनवलप/डिमॉड्युलेशन विश्लेषण खातिर इस्तेमाल होला।

हर पैरामीटर कब इस्तेमाल करीं
पैरामीटरइकाईफ्रीक्वेंसी रेंजसबसे बढ़िया के खातिरमानक
विस्थापनµm pk-pk1–100 Hzधीमा मशीन (< 600 RPM), शाफ्ट ऑर्बिट, प्रॉक्सिमिटी प्रोब, जर्नल बेयरिंग (संदर्भ — Balanset-1A से मापल नइखे गइल)ISO 7919 (शाफ्ट कंपन)
वेगmm/s RMS10–1000 Hzसामान्य मशीनरी निगरानी — अनबैलेंस, मिसअलाइनमेंट, ढीलापन। डिफॉल्ट पैरामीटर। Balanset-1A के मूल (आ इकलौता) पैरामीटर।ISO 10816, ISO 20816
त्वरणg या m/s² RMS500 Hz – 20 kHzशुरुआती बेयरिंग खराबी, गियर मेश, झटका, हाई-स्पीड मशीनरी (संदर्भ — Balanset-1A से मापल नइखे गइल)ISO 15242 (बेयरिंग वाइब्रेशन)
एगो सिंगल फ्रीक्वेंसी पर कन्वर्शन
v = 2πf · d   |   a = 2πf · v = (2πf)² · d
d = डिस्प्लेसमेंट (m), v = वेलोसिटी (m/s), a = एक्सेलरेशन (m/s²), f = फ्रीक्वेंसी (Hz)। सभ मात्रा में एक्के एम्प्लीट्यूड कन्वेंशन (सभ पीक, सभ पीक-टू-पीक, भा सभ RMS) इस्तेमाल होखे के चाहीं — पीक-टू-पीक डिस्प्लेसमेंट के RMS वेलोसिटी से मिलावे पर ~2.8× गलती आवेला।
💡 सामान्य नियम

अगर रउआ लगे खाली एगो सेंसर आ चुनल खातिर एगो पैरामीटर बा — वेग (mm/s RMS) चुनीं. ई फ्लैट रेस्पॉन्स के साथे आम खराबी सभ के सबसे व्यापक रेंज के कवर करेला। Balanset-1A एकरा के अपना नेटिव पैरामीटर के रूप में इस्तेमाल करेला। एक्सेलेरेशन मापन तब्बे जोड़ीं जब रउआके उच्च फ्रीक्वेंसी पर शुरुआती चरण के बेयरिंग भा गियर के खराबी पकड़े के जरूरत होखे।

Balanset-1A के साथे मापन तकनीक

📋 Balanset-1A मेजरमेंट स्पेसिफिकेशन

Balanset-1A मापेला कंपन वेग, mm/s RMS (0.2–80 mm/s). मापन बैंड: 5–1000 Hz; सेंसर ~550 Hz तक ±10% के भीतर फ्लैट ह, ओकरा ऊपर सिर्फ डिस्प्ले खातिर रोल-ऑफ मुआवजा के साथ। ऑन-स्क्रीन स्पेक्ट्रम ("Spectrum, Hz" सेटिंग) एतना तक बढ़ल 8 kHz — एगो डिस्प्ले रेंज ह, मापन-सटीकता के दावा ना। इहां कवनो डिस्प्लेसमेंट भा एक्सेलरेशन मोड नइखे आ कवनो एनवलप/डीमॉड्युलेशन नइखे — नीचे एक्सेलरेशन, एनवलप विश्लेषण, आ कैविटेशन के सेक्शन सिर्फ संदर्भ सामग्री बा।

सेंसर के स्थान

डायग्नोसिस के गुणवत्ता पूरा तरह से मापन के गुणवत्ता पर निर्भर करेला। वाइब्रेशन बल बेयरिंग सभ के माध्यम से संचारित होला, एहसे सेंसर सभके बेयरिंग हाउसिंग पर लगावल जरूरी बा — बेयरिंग के जेतना नजदीक हो सके, लोड-बेयरिंग संरचना पर (कवर भा कूलिंग फिन पर ना)।

  • सतह के तैयारी: साफ, समतल, पेंट के परत से मुक्त। मैग्नेटिक बेस बिल्कुल सटीक बैठल होखे के चाहीं।
  • रेडियल हॉरिजॉन्टल (H): शाफ्ट के लंबवत, हॉरिजॉन्टल प्लेन में। अक्सर सबसे ढेर एम्प्लीट्यूड।
  • रेडियल वर्टिकल (V): शाफ्ट के लंबवत, वर्टिकल प्लेन में।
  • एक्सियल (A): शाफ्ट के समानांतर। मिसअलाइनमेंट पता लगावे खातिर महत्वपूर्ण।
💡 टू-चैनल डायग्नोस्टिक ट्रिक

Balanset-1A में 2 चैनल बा। डायग्नोस्टिक्स खातिर, दुनो सेंसर के उहे बेयरिंग — एगो रेडियल, एगो एक्सियल। ई एक्के समय रेडियल + एक्सियल स्पेक्ट्रा देला, जे तुरंत मिसअलाइनमेंट पता लगावे में सक्षम बनावेला।

डायग्नोस्टिक्स खातिर Balanset-1A के मोड सभ

  • F8 — Charts → "F5-Spectrum (Hz)" टैब: पूरा FFT स्पेक्ट्रम डिस्प्ले। मुख्य डायग्नोस्टिक मोड। बाकी Charts टैब — F2-Overall, F3-1x, F4-Harmonics (1x..Nx), आ F6-Orbit — ओवरऑल कंपन, 1× ट्रैकिंग, हार्मोनिक पैटर्न, आ शाफ्ट ऑर्बिट के कवर करेला।
  • F5 — Vibration Meter: तुरंत आकलन। V1s (कुल RMS) के V1o (1×) से तुलना करीं। अगर V1s ≈ V1o → अनबैलेंस। अगर V1s ≫ V1o → अन्य खराबी।
  • F6 — Reports: मेजरमेंट आर्काइव आ HTML रिपोर्ट — बेसलाइन स्टोर करे खातिर एकर इस्तेमाल करीं।
  • F9 — Route Inspection: ISO 10816-1 के मुताबिक ट्रेंड जोन वाला गाइडेड मापन रूट — नियमित निगरानी दौरा खातिर।
⚠️ V1s बनाम V1o — पहिला डायग्नोस्टिक चेक

बैलेंसिंग से पहिले, V1s के V1o से तुलना करीं। अगर V1s ≫ V1o होखे (जइसे, 8 बनाम 2 mm/s), त ज्यादातर वाइब्रेशन अनबैलेंस से नइखे। बैलेंसिंग एकरा के हल ना करी — पूरा स्पेक्ट्रम के जांच करीं।

फेज एनालिसिस — डायग्नोस्टिक डिफरेंशिएटर

फ्रीक्वेंसी रउआके बतावेला कि का चीज का वाइब्रेट हो रहल बा; फेज रउआके बतावेला कि कइसे. दू खराबी एक्के जइसन स्पेक्ट्रा पैदा कर सकेला (दुनो पर 1× के हावी) — सिर्फ फेज विश्लेषण से इनका बीच फर्क कइल जा सकेला। फेज अलग-अलग मापन बिंदु पर कंपन के बीच कोणीय संबंध ह, डिग्री (0°–360°) में मापल जाला।

🧭 फेज → डायग्नोसिस संदर्भ तालिका
फेज संबंधमापन बिंदु (मेजरमेंट पॉइंट्स)डायग्नोसिसव्याख्या
0° (इन-फेज)बेयरिंग 1 ↔ बेयरिंग 2 (रेडियल)स्थैतिक अनबैलेंस (Static unbalance)दुनो बेयरिंग एक्के साथ सिंक में हिलेला — रोटर के केंद्र में एगो भारी स्थान। सिंगल-प्लेन करेक्शन।
~180° (एंटी-फेज)बेयरिंग 1 ↔ बेयरिंग 2 (रेडियल)डायनामिक (कपल) अनबैलेंसबेयरिंग सभ विपरीत दिशा में डोले लें — अलग-अलग प्लेन पर दू गो भारी स्पॉट एगो रॉकिंग कपल बनावे लें। टू-प्लेन करेक्शन के जरूरत बा।
~90°हॉरिजॉन्टल ↔ वर्टिकल (एके बेयरिंग)अनबैलेंस (कवनो प्रकार)अनबैलेंस खातिर सामान्य — बल वेक्टर शाफ्ट के साथे घूमेला, जेकरा से एके बिंदु पर H आ V के बीच ~90° पैदा होला।
~180°कपलिंग के आर-पार (रेडियल)पैरेलल मिसअलाइनमेंटकपलिंग बल शाफ्ट सभ के विपरीत रेडियल दिशा सभ में अलग-अलग धकेलेला। उच्च 2× के साथे कपलिंग के आर-पार 180° एकर पहचान ह।
~180°कपलिंग के आर-पार (एक्सियल)कोणीय मिसअलाइनमेंटशाफ्ट सभ बारी-बारी से एक्सियल रूप से धक्का/खींच देलें। उच्च 1× आ 2× के साथे कपलिंग के आर-पार 180° एक्सियल निर्णायक ह।
कपलिंग के आर-पार (एक्सियल)मिसअलाइनमेंट नादुनो तरफ एके अक्षीय (axial) दिशा में हलचल हो रहल बा — इ शायद थर्मल ग्रोथ, पाइपिंग स्ट्रेन, भा सॉफ्ट फुट के कारण होई। ई एंगुलर मिसअलाइनमेंट नइखे।
अनियमित / अस्थिरकवनो संगत बिंदुयांत्रिक ढीलापननाप-जोख के बीच फेज रीडिंग बेतरतीब ढंग से उछलेला — ई ढीला जोड़ में झटका के लक्षण ह। अस्थिर फेज = ढीलापन (looseness)।
धीरे-धीरे खिसकतकवनो बिंदु, समय के संगेरेजोनेंस भा थर्मल प्रभाववार्मअप के दौरान धीरे-धीरे फेज में बदलाव ई बतावेला कि तापमान के संगे संरचनात्मक कठोरता (structural stiffness) बदल रहल बा (थर्मल मिसअलाइनमेंट)।
संगत, गैर-0/180°बेयरिंग 1 ↔ बेयरिंग 2स्टैटिक + कपल अनबैलेंस के मिश्रण0° आ 180° के बीच फेज स्टैटिक आ कपल कंपोनेंट के मिश्रण देखावेला — एकरा खातिर टू-प्लेन बैलेंसिंग के जरूरत बा।
💡 Balanset-1A से फेज मापन

Balanset-1A टैकोमीटर के संदर्भ बनाके 1× पर फेज देखावेला (vibrometer मोड में F1° रीडिंग)। दू बेयरिंग के बीच फेज तुलना करे खातिर, टैकोमीटर के एके संदर्भ निशान पर राखके हर बेयरिंग के एके दिशा में (जइसे, हॉरिजॉन्टल) मापीं। फेज रीडिंग के अंतर खराबी के किसिम बतावेला। कवनो खास सॉफ्टवेयर के जरूरत नइखे — बस दुनो रीडिंग के घटाईं।

दोष 1: अनबैलेंस (Unbalance)

कारण: द्रव्यमान के केंद्र घूर्णन धुरी से खिसकल। निर्माण टॉलरेंस, जमाव, क्षरण, टूटल ब्लेड, गुम वजन।

स्पेक्ट्रम: ठीक 1× RPM पर प्रमुख पीक। बहुत कम हार्मोनिक्स। रेडियल कंपन। अनबैलेंस बल स्पीड² के साथ बढ़ेला; कंपन एम्प्लीट्यूड स्पीड के साथ बढ़ेला, सही संबंध रेजोनेंस के नजदीकी पर निर्भर करेला। फेज स्थिर आ दोहरावे लायक ह।

स्टैटिक अनबैलेंस (सिंगल-प्लेन)

शुद्ध 1× पीक, साइनसॉइडल वेवफॉर्म। दुनो बेयरिंग इन-फेज। सिंगल-प्लेन करेक्शन।

स्टैटिक अनबैलेंस — 25 Hz (1500 RPM) पर प्रमुख 1×। न्यूनतम हार्मोनिक्स।

डायनामिक अनबैलेंस (टू-प्लेन / कपल)

ई भी 1× प्रमुख बा, लेकिन बेयरिंग लगभग 180° फेज से बाहर बा। टू-प्लेन करेक्शन जरूरी बा।

डायनामिक अनबैलेंस — 1× प्रमुख। स्पेक्ट्रम स्टैटिक जइसन बा लेकिन बेयरिंग पर फेज अलग बा।

कार्रवाई: निष्पादित करीं रोटर बैलेंसिंग Balanset-1A से। G-ग्रेड सहनशीलता प्रति ISO 1940-1.

दोष 2: शाफ्ट मिसअलाइनमेंट

कारण: जुड़ल शाफ्ट के अक्ष मेल ना खाला। ई पैरेलल (ऑफसेट) भा एंगुलर (झुकल) हो सकेला, आमतौर पर दुनो।

पैरेलल मिसअलाइनमेंट (रेडियल)

रेडियल दिशा में उच्च 1× आ 2×। 2× अक्सर 1× से ≥ होला। कपलिंग के आर-पार 180° फेज शिफ्ट।

पैरेलल मिसअलाइनमेंट — रेडियल दिशा। मजबूत 1× आ 2× के संगे मामूली 3×।

एंगुलर मिसअलाइनमेंट — रेडियल

रेडियल दिशा में 1× आ 2× दुनो मौजूद बा — कवनो भी हावी हो सकेला, एहसे सिर्फ रेडियल स्पेक्ट्रम निर्णायक नइखे। एक्सियल मापन तय करेला।

एंगुलर मिसअलाइनमेंट — रेडियल (R)। दुनों 1× आ 2× बढ़ल (एह उदाहरण में 2× > 1×)।

एंगुलर मिसअलाइनमेंट — एक्सियल

एक्सियल कंपन ≥ रेडियल के 50%, आमतौर पर ऊंच 2× आ 3× के साथ 1× के प्रभुत्व। एक्सियल में कपलिंग के आर-पार 180° फेज। ई मुख्य भेद करे वाला मापन ह।

एंगुलर मिसअलाइनमेंट — एक्सियल (A)। एक्सियल दिशा में मजबूत 2× आ 3× के साथ प्रभावी 1×।

कार्रवाई: बैलेंसिंग से मदद ना मिली। मशीन के बंद करीं आ शाफ्ट अलाइनमेंट करीं। बाद में वाइब्रेशन के फेर से जांच करीं।

दोष 3: मैकेनिकल ढीलापन (Looseness)

कारण: संरचनात्मक कठोरता के नुकसान — ढीला बोल्ट, फाउंडेशन में दरार, घिसल बेयरिंग सीट, अत्यधिक क्लीयरेंस।

कंपोनेंट ढीलापन

हार्मोनिक्स के "जंगल" — 1×, 2×, 3×, 4×… 10×+ तक घटत एम्प्लीट्यूड के संगे। 0.5× सबहार्मोनिक्स भी देखा सकेला।

कंपोनेंट ढीलापन — 1× से 10× तक कई हार्मोनिक्स। 0.4–0.5× क्षेत्र में सबहार्मोनिक नोट करीं।

संरचनात्मक ढीलापन

1× आ/भा 2× प्रमुख। कम उच्च हार्मोनिक्स। मजबूत वर्टिकल वाइब्रेशन।

संरचनात्मक ढीलापन — 1× आ 2× हावी। न्यूनतम उच्च हार्मोनिक्स।

कार्रवाई: माउंटिंग बोल्ट के जांच आ कस के बांधीं। फाउंडेशन के जांच करीं। हमेशा ढीलापन के जांच करीं पहिले बैलेंसिंग।

दोष 4: रोलिंग बेयरिंग खराबी

कारण: पिटिंग, स्पॉलिंग, रेसवे, रोलिंग एलिमेंट, भा केज पर घिसाव।

बेयरिंग डिफेक्ट फ्रीक्वेंसी
BPFO = (n/2)(1 − Bd/Pd·cos α) · fs
BPFI = (n/2)(1 + Bd/Pd·cos α) · fs
BSF = (Pd/2Bd)(1 − (Bd/Pd·cos α)²) · fs
FTF = ½(1 − Bd/Pd·cos α) · fs
n = रोलिंग एलिमेंट सभ | Bd = बॉल व्यास | Pd = पिच व्यास | α = कॉन्टैक्ट एंगल | fs = RPM/60

बाहरी रेस डिफेक्ट (BPFO)

BPFO, 2×BPFO, 3×BPFO… पर पीक सभ के सीरीज। 1× साइडबैंड ना (स्थिर रिंग)। सबसे आम बेयरिंग फॉल्ट।

बाहरी रेस डिफेक्ट — नॉन-सिंक्रोनस फ्रीक्वेंसी पर BPFO हार्मोनिक्स। साइडबैंड ना।

भीतरी रेस डिफेक्ट (BPFI)

±1× साइडबैंड के साथ BPFI हार्मोनिक्स (घूमत रिंग, लोड जोन मॉड्युलेशन)। साइडबैंड पैटर्न मुख्य पहचान चिन्ह ह।

भीतरी रेस डिफेक्ट — ±1× साइडबैंड के साथ BPFI हार्मोनिक्स (मुख्य पीक सभ के चारों ओर छोट पीक सभ)।

रोलिंग एलिमेंट डिफेक्ट (BSF)

BSF हार्मोनिक्स। 2×BSF अक्सर प्रमुख होला। नॉन-सिंक्रोनस। अक्सर रेस डैमेज के साथ होला।

रोलिंग एलिमेंट डिफेक्ट — BSF हार्मोनिक्स। ध्यान दीं कि 2×BSF सबसे ऊँच ह (दू-एलिमेंट डैमेज)।

केज डिफेक्ट (FTF)

सब-सिंक्रोनस फंडामेंटल (FTF ≈ 0.4× शाफ्ट स्पीड); एकर हार्मोनिक्स 1× से ऊपर भी बढ़ सकेला। कम फ्रीक्वेंसी। अक्सर दोसर बेयरिंग नुकसान के साथ होला।

केज दोष — FTF फंडामेंटल सब-सिंक्रोनस ह (1× से नीचे); एकर हार्मोनिक्स 1× शाफ्ट स्पीड से ऊपर भी बढ़ सकेला।
बेयरिंग डिफेक्ट प्रगति (4 चरण)

चरण 1 — सबसरफेस: अल्ट्रासोनिक / एकॉस्टिक-एमिशन जोन (लगभग 20–60 kHz)। स्टैंडर्ड FFT पर देखाई ना देला। स्पाइक एनर्जी / एनवलपिंग से पता लगावे लायक।

चरण 2 — शुरुआती डिफेक्ट: इम्पैक्ट बेयरिंग के नैचुरल फ्रीक्वेंसी (लगभग 500–2000 Hz) के गुंजावेला; एह स्टेज के अंत के ओर अलग खराबी फ्रीक्वेंसी (BPFO, BPFI) कम एम्प्लीट्यूड पर देखाई देला। Balanset-1A लेट स्टेज 2 से आगे अलग खराबी फ्रीक्वेंसी (दस से सैकड़ों Hz) के भरोसेमंद तरीका से पकड़ेला।

चरण 3 — बढ़ल हुआ: कई हार्मोनिक्स। साइडबैंड बनेला। नॉइज़ फ्लोर बढ़ेला।

चरण 4 — उन्नत: ब्रॉडबैंड नॉइज़। बेयरिंग फ्रीक्वेंसी सभ नॉइज़ में गायब हो सकेला। बदलाव तुरंत जरूरी ह।

एनवेलप (डीमॉड्युलेशन) एनालिसिस — शुरुआती बेयरिंग डिटेक्शन

स्टैंडर्ड FFT स्पेक्ट्रम विश्लेषण लेट स्टेज 2 से बेयरिंग दोष के पता लगावेला। एकरा पहिले, बेयरिंग इम्पैक्ट बहुत कमजोर होला — आ फ्रीक्वेंसी में बहुत ऊंच — कि नॉइज फ्लोर से ऊपर देखाई पड़ सकस। एन्वलप विश्लेषण (एकरा के डीमॉड्युलेशन या हाई-फ्रीक्वेंसी डिटेक्शन, HFD भी कहल जाला) डिटेक्शन के बहुत पहिले के चरण तक बढ़ा देला।

ई कइसे काम करेला

जब कवनो रोलिंग एलिमेंट कवनो डिफेक्ट से टकरालाला, त ऊ एगो छोट इम्पैक्ट पल्स पैदा करेला जे हाई-फ्रीक्वेंसी स्ट्रक्चरल रेजोनेंस (आमतौर पर 5–20 kHz) के उत्तेजित करेला। ई रेजोनेंस सभ हर इम्पैक्ट पर थोड़ी देर खातिर "रिंग" करेला। एनवेलप एनालिसिस तीन चरण में काम करेला:

  1. बैंड-पास फिल्टर: हाई-फ्रीक्वेंसी रेजोनेंस बैंड (जइसे, 5–15 kHz) के अलग करीं जहाँ इम्पैक्ट सभ रिंग करेला।
  2. रेक्टिफाई आ एनवेलप करीं: एम्प्लीट्यूड मॉड्युलेशन पैटर्न निकालीं — "एनवेलप" जे रिंगिंग के पीक सभ के फॉलो करेला।
  3. एनवेलप के FFT: एनवेलप सिग्नल पर FFT लागू करीं। नतीजा देखावेला पुनरावृत्ति दर इम्पैक्ट सभ के — जे बेयरिंग डिफेक्ट फ्रीक्वेंसी सभ (BPFO, BPFI, BSF, FTF) के बराबर होला।
एनवेलप पहिले काहे पता लगावेला

कच्चा स्पेक्ट्रम में, BPFO पर एगो कमजोर इम्पैक्ट 0.1 mm/s पैदा कर सकेला — जे 2 mm/s के मशीन नॉइज़ के बीच अदृश्य रहेला। लेकिन ऊहे इम्पैक्ट 8 kHz पर एगो रेजोनेंस के उत्तेजित करेला जहाँ कवनो दोसरा वाइब्रेशन सोर्स ना होला। डीमॉड्युलेशन के बाद, BPFO के रिपिटीशन पैटर्न साफ बैकग्राउंड से साफ-साफ उभर के आवेला।

संबंधित पैरामीटर

  • स्पाइक एनर्जी (SE): हाई-फ्रीक्वेंसी इम्पैक्ट एनर्जी के कुल माप। स्केलर ट्रेंडिंग वैल्यू। "गो/नो-गो" स्क्रीनिंग खातिर बढ़िया।
  • gSE / HFD / PeakVue: एनवेलप से निकलल पैरामीटर सभ खातिर वेंडर-विशिष्ट नाम। सब एक्के सिद्धांत पर आधारित ह।
  • एक्सेलरेशन एनवेलपिंग: Balanset-1A वेलोसिटी (mm/s) में मापेला। पूरा एनवलप विश्लेषण खातिर, एक्सेलरेशन इनपुट आ बैंड-पास फिल्टरिंग क्षमता वाला समर्पित एनालाइजर आदर्श ह। हालांकि, Balanset-1A के FFT लेट स्टेज 2 से आगे स्टैंडर्ड वेलोसिटी स्पेक्ट्रम में अलग बेयरिंग खराबी फ्रीक्वेंसी के अभी भी असरदार तरीका से पकड़ सकेला।
भीतरी रेस डिफेक्ट के एनवेलप स्पेक्ट्रम — डीमॉड्युलेटेड हाई-फ्रीक्वेंसी सिग्नल से BPFI हार्मोनिक्स साफ-साफ उभर के आवेला। कच्चा वेलोसिटी स्पेक्ट्रम से तुलना करीं जहाँ ई नॉइज़ में छिपल हो सकेला।

कार्रवाई: लुब्रिकेशन जांच करीं। बेयरिंग बदलाव के योजना बनाईं। मॉनिटरिंग फ्रीक्वेंसी बढ़ाईं।

फॉल्ट 5: गियर डिफेक्ट

कारण: घिसल, गड्ढा वाला, या टूटल दांत। गियर एक्सेंट्रिसिटी। GMF = दांत सभ के संख्या × शाफ्ट RPM / 60।

गियर एक्सेंट्रिसिटी

±1× शाफ्ट स्पीड पर साइडबैंड के साथ GMF। गियर के 1× भी बढ़ल हो सकेला।

गियर एक्सेंट्रिसिटी — ±1× साइडबैंड के साथ 500 Hz पर GMF। बढ़ल 1×।

गियर दांत घिसाव / डैमेज

घन साइडबैंड के साथ कई GMF हार्मोनिक्स। गंभीरता साइडबैंड गिनती आ एम्प्लीट्यूड के साथ बढ़ेला।

गियर घिसाव — 1× अंतराल पर कई साइडबैंड के साथ GMF आ 2×GMF।

कार्रवाई: गियरबॉक्स तेल में धातु के कण जांच करीं। निरीक्षण के अनुसूची बनाईं। GMF साइडबैंड ट्रेंड मॉनिटर करीं।

फॉल्ट 6: इलेक्ट्रिकल फॉल्ट (मोटर)

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गड़बड़ी से वाइब्रेशन एह पर पैदा होला 2× लाइन फ्रीक्वेंसी (50 Hz ग्रिड पर 100 Hz, 60 Hz पर 120 Hz). जरूरी टेस्ट: पावर काटला पर वाइब्रेशन तुरंते गायब हो जाला। मैकेनिकल गड़बड़ी धीरे-धीरे कम होला।

  • स्टेटर एक्सेंट्रिसिटी: 2× लाइन फ्रीक्वेंसी, स्थिर एम्प्लीट्यूड।
  • रोटर बार डिफेक्ट: 1× रनिंग स्पीड के आसपास पोल-पास फ्रीक्वेंसी (स्लिप × पोल के संख्या — आमतौर पर 0.5–2 Hz, एहसे इनका अलग करे खातिर बारीक फ्रीक्वेंसी रिजॉल्यूशन के जरूरत बा) पर दूरी वाला साइडबैंड। 2× लाइन फ्रीक्वेंसी साइडबैंड के साथ एगो रोटर बार पास फ्रीक्वेंसी (बार के संख्या × शाफ्ट स्पीड) भी देखाई दे सकेला।
  • सॉफ्ट फुट: जब मोटर के अलग-अलग पैर ढीला कइल जाला त वाइब्रेशन में बदलाव आवेला।

गड़बड़ी 7: बेल्ट ड्राइव के समस्या

कारण: घिसल, मिसअलाइन, भा गलत टेंशन वाला बेल्ट। बेल्ट ड्राइव एह पर वाइब्रेशन पैदा करेला बेल्ट पास फ्रीक्वेंसी, जे आमतौर पर सब-सिंक्रोनस फ्रीक्वेंसी (1× शाफ्ट स्पीड से कम) होला काहेकि बेल्ट पुली के परिधि से लमहर होला।

बेल्ट फ्रीक्वेंसी
fबेल्ट = (π · D · RPM) / (60 · L)
D = पुली के व्यास (m) | L = बेल्ट के लंबाई (m) | RPM = पुली के स्पीड

आम बेल्ट सिग्नेचर

  • बेल्ट के घिसाव / खराबी: बेल्ट फ्रीक्वेंसी (fबेल्ट) आ एकर हार्मोनिक्स (2×, 3×, 4× fबेल्ट)। फंडामेंटल 1× शाफ्ट स्पीड से नीचे देखाई देला — एगो सब-सिंक्रोनस पीक मुख्य संकेतक ह; ऊंच हार्मोनिक्स 1× से ऊपर भी बढ़ सकेला।
  • बेल्ट मिसअलाइनमेंट: 1× आ 2× शाफ्ट स्पीड पर बढ़ल एक्सियल वाइब्रेशन। शाफ्ट मिसअलाइनमेंट जइसन ही बाकिर सिर्फ बेल्ट से चलेवाला मशीन तक सीमित।
  • गलत टेंशन: ऊँच 1× वाइब्रेशन जे बेल्ट टेंशन एडजस्ट करला से नाटकीय रूप से बदल जाला। जादा टाइट बेल्ट से बेयरिंग लोड बढ़ेला; ढीला बेल्ट से थपथपाहट (स्लैपिंग) आ बेल्ट-फ्रीक्वेंसी पीक होला।
  • अनुनाद: बेल्ट के नेचुरल फ्रीक्वेंसी (बेल्ट "फ्लटर") तब उत्तेजित हो सकेला जब बेल्ट स्पैन के रेजोनेंस ऑपरेटिंग स्पीड से मेल खाए। ई बेल्ट नेचुरल फ्रीक्वेंसी पर चौड़ा पीक के रूप में देखाई देला।
बेल्ट ड्राइव दोष — बेल्ट फ्रीक्वेंसी फंडामेंटल सब-सिंक्रोनस ह; एकर हार्मोनिक्स 1× शाफ्ट स्पीड (25 Hz) तक आ ओकरा से ऊपर भी बढ़ेला।

कार्रवाई: बेल्ट के हालत, टेंशन, आ पुली के अलाइनमेंट जांचीं। घिसल बेल्ट बदलीं। बार-बार समस्या होखे त लेजर टूल भा स्ट्रेट-एज से पुली अलाइनमेंट जांचीं।

गड़बड़ी 8: पंप कैविटेशन

कारण: जब स्थानीय दबाव तरल के वाष्प दबाव से कम हो जाला — आमतौर पर पंप सक्शन पर — त वाष्प के बुलबुला बनेला आ जोर से फूट जाला। हर बुलबुला के फूटल से माइक्रो-इम्पैक्ट पैदा होला। हर सेकेंड हजारों बुलबुला फूटला से एगो खास ब्रॉडबैंड आवाज पैदा होला।

स्पेक्ट्रल सिग्नेचर

  • ब्रॉडबैंड ऊर्जा: मैकेनिकल खराबी (जे अलग पीक पैदा करेला) से उलट, कैविटेशन एगो उठल, अनियमित नॉइज फ्लोर पैदा करेला जे बड़हन फ्रीक्वेंसी बैंड में फइलल होला — नीचे के चार्ट में, लगभग 200 Hz से देखावल गइल रेंज के किनारा तक। स्पेक्ट्रम तीखा पीक के बदले एगो "उभार" भा ऊंच पठार जइसन देखाई देला।
  • रैंडम, गैर-आवर्ती: कोनो हार्मोनिक्स नइखे, शाफ्ट स्पीड से कोनो संबंध नइखे। आवाज "बजरी" भा "कड़कड़ाहट" जइसन सुनाई देला — बिना उपकरण के भी सुनाई पड़ेला।
  • निम्न-फ्रीक्वेंसी प्रभाव: गंभीर कैविटेशन से 1× पर अस्थिरता आ फ्लो टर्बुलेंस से ब्रॉडबैंड निम्न-फ्रीक्वेंसी नॉइज़ भी हो सकेला।
पंप कैविटेशन — ब्रॉडबैंड हाई-फ्रीक्वेंसी नॉइज़ (200 Hz से ऊपर बढ़ल फ्लोर)। कोनो अलग पीक नइखे — बेयरिंग खराबी से एह में फर्क बा जे खास फ्रीक्वेंसी देखावेला।

कार्रवाई: सक्शन प्रेशर बढ़ाईं (पंप के नीचे राखीं, सक्शन वाल्व खोलीं, सक्शन पाइप के नुकसान कम करीं). NPSH जांचींउपलब्ध बनाम NPSHजरूरी जरूरी। जदी संभव होखे त पंप के स्पीड घटाईं। कैविटेशन से तेजी से घिसाव के नुकसान होला — एकरा के नजरअंदाज मत करीं।

गड़बड़ी 9: ऑयल व्हर्ल & ऑयल व्हिप (जर्नल बेयरिंग)

कारण: जर्नल (स्लीव) बेयरिंग में फ्लुइड-फिल्म अस्थिरता। ऑइल फिल्म वेज शाफ्ट के बेयरिंग क्लियरेंस के भीतर सब-सिंक्रोनस फ्रीक्वेंसी पर घूमे खातिर मजबूर करेला। ई रोलिंग एलिमेंट बेयरिंग खराबी से अलग ह आ सिर्फ प्लेन/जर्नल बेयरिंग में ही होला। शाफ्ट ऑर्बिट डिस्प्ले — F8 — Charts → F6-Orbit टैब Balanset-1A पर — जर्नल-बेयरिंग के व्यवहार देखे के क्लासिक तरीका ह।

तेल व्हर्ल

  • आवृत्ति: लगभग 0.42× से 0.48× शाफ्ट स्पीड (अक्सर ~0.43× कहल जाला)। ई सब-सिंक्रोनस पीक ह जे शाफ्ट स्पीड के फॉलो करेला — जदी RPM बढ़ी त व्हर्ल फ्रीक्वेंसी भी अनुपात में बढ़ी।
  • स्पेक्ट्रम: ~0.43× पर एगो अकेल पीक जे स्पीड के साथ खिसकेला। एम्प्लीट्यूड मध्यम हो सकेला।
  • स्थिति: ऑयल व्हिप के पूर्ववर्ती। आमतौर पर तुरंत विनाशकारी नइखे बाकिर अस्थिरता के संकेत देला।

ऑयल व्हिप

  • आवृत्ति: रोटर के पहिला प्राकृतिक आवृत्ति (क्रिटिकल स्पीड) पर लॉक हो जाला। ह्विर्ल से अलग, ई शाफ्ट के स्पीड ट्रैक ना करे — RPM बदलला पर भी फ्रीक्वेंसी स्थिर रहे ला।
  • स्पेक्ट्रम: रोटर के पहिला क्रिटिकल स्पीड पर बड़हन सब-सिंक्रोनस पीक। एम्प्लीट्यूड बहुत ऊँच हो सके ला — विनाशकारी।
  • स्थिति: खतरनाक। तुरंत कार्रवाई जरूरी बा। एहसे बेयरिंग वाइप-आउट अउर शाफ्ट के नुकसान हो सके ला।
ऑयल व्हर्ल — शाफ्ट स्पीड के ~0.43× पर सब-सिंक्रोनस पीक (1500 RPM खातिर ≈ 10.7 Hz)। ई 0.5× लूजनेस से अलग बा।
⚠️ ऑयल व्हर्ल बनाम लूजनेस — कइसे पहचानल जाय

दुनों में सब-सिंक्रोनस पीक बनेला, बाकिर: ऑयल व्हर्ल ~0.42–0.48× पर बइठेला (बिल्कुल हाफ-ऑर्डर ना), जबकि ढिलाई बिल्कुल 0.5×, 1.5×, 2.5× पर पीक पैदा करेला — सटीक हाफ-ऑर्डर फ्रैक्शन। दुनो बदलत शाफ्ट स्पीड के पालन करेला; ऊ एक जे करेला नाहीं ट्रैक स्पीड बा ऑयल व्हिप, जे रोटर के पहिला क्रिटिकल फ्रीक्वेंसी पर लॉक हो जाला। ऑयल व्हर्ल सिर्फ जर्नल/स्लीव बेयरिंग में होला — अगर मशीन में रोलिंग एलिमेंट बेयरिंग बा, त ई ऑयल व्हर्ल नइ हो सकेला।

कार्रवाई: ऑयल व्हर्ल खातिर: बेयरिंग क्लियरेंस, ऑयल विस्कोसिटी, अउर लोड के जांच करीं। बेयरिंग लोडिंग बढ़ाईं भा ऑयल विस्कोसिटी बदलीं। ऑयल व्हिप खातिर: तुरंत स्पीड कम करीं क्रिटिकल थ्रेशोल्ड से नीचे। रोटर डायनेमिक्स के स्पेशलिस्ट से सलाह लीं।

ISO 10816 कंपन गंभीरता — वर्गीकरण तालिका

ISO 10816-1 (ISO 10816 सीरीज के आम हिस्सा, जेकरा ISO 20816 बदल दिहलस बाकिर अबहीं ले व्यापक रूप से हवाला दिहल जाला) चार मशीन क्लास खातिर कंपन गंभीरता जोन परिभाषित करेला। कंपन बेयरिंग हाउसिंग पर mm/s RMS में वेलोसिटी के रूप में मापल जाला। नीचे दिहल टेबल चारो क्लास खातिर सगरी जोन सीमा देखावेला — माप के मूल्यांकन करत घरी एकरा जल्दी संदर्भ के रूप में इस्तेमाल करीं। ध्यान राखीं कि ISO 10816-3 (अब ISO 20816-3), जे 120–15,000 RPM पर चले वाला 15 kW से जादे के औद्योगिक मशीन के कवर करेला, ओहिजा देखावल गइल Class I–IV के जगह एगो अलग स्कीम — रिजिड भा फ्लेक्सिबल सपोर्ट क्लास वाला दुगो मशीन ग्रुप — इस्तेमाल करेला।

📋 ISO 10816-1 वाइब्रेशन सेवेरिटी जोन — मशीन क्लास I–IV (mm/s RMS)
मशीन क्लास जोन A
अच्छा
जोन B
स्वीकार्य
जोन C
चेतावनी
जोन D
खतरा
क्लास I
छोट मशीन ≤ 15 kW
(पंप, पंखा, कंप्रेसर)
≤ 0.71 0.71 – 1.8 1.8 – 4.5 > 4.5
क्लास II
मध्यम मशीन 15–75 kW
(बिना खास फाउंडेशन के)
≤ 1.12 1.12 – 2.8 2.8 – 7.1 > 7.1
क्लास III
बड़हन मशीन > 75 kW
(रिजिड फाउंडेशन)
≤ 1.8 1.8 – 4.5 4.5 – 11.2 > 11.2
क्लास IV
बड़हन मशीन > 75 kW
(फ्लेक्सिबल फाउंडेशन, जइसे स्टील फ्रेम)
≤ 2.8 2.8 – 7.1 7.1 – 18 > 18
📌 ई टेबल के कइसे इस्तेमाल करीं

चरण 1: पावर अउर फाउंडेशन के प्रकार से आपन मशीन क्लास तय करीं।
चरण 2: हर बेयरिंग हाउसिंग पर रेडियल दिशा में कुल वाइब्रेशन वेलोसिटी (mm/s RMS) मापीं।
चरण 3: जोन पता करीं। जोन A = नया कमीशन कइल गइल भा उत्कृष्ट। जोन B = बिना रोक-टोक के लंबा समय ले चलावे लायक। जोन C = खाली सीमित समय खातिर स्वीकार्य — मेंटेनेंस के शेड्यूल करीं। जोन D = नुकसान हो रहल बा — जल्द से जल्द मशीन बंद करीं।

याद राखीं: ट्रेंड, एब्सोल्यूट वैल्यू से ज्यादा मायने राखे ला। 2.4 mm/s (क्लास II खातिर जोन B) पर चलत मशीन जे पहिले 1.2 mm/s पर रहे, दुगुना हो गइल — भले ऊ अभिन "स्वीकार्य" होखे, कारण के जांच करीं। Balanset-1A के vibrometer मोड (F5) तुरंत जोन आकलन खातिर ओवरऑल वेलोसिटी V1s देखावेला।

⚠️ ISO 10816 बनाम ISO 20816

ISO 10816 के औपचारिक रूप से ISO 20816 (2016–2022 में प्रकाशित) से बदल दिहल गइल बा। ज्यादातर मशीन प्रकार खातिर जोन के सीमा लगभग एके तरह बा, बाकिर ISO 20816 डिस्प्लेसमेंट खातिर मूल्यांकन मानदंड जोड़े ला अउर मशीन-विशिष्ट भाग के बढ़ावे ला। व्यवहार में, ISO 10816 के वैल्यू अबहियों उद्योग-मानक संदर्भ बनल बा। Balanset-1A अउर ज्यादातर औद्योगिक वाइब्रेशन प्रोग्राम अबहियों ISO 10816 जोन इस्तेमाल करे लें।

मापन से मॉनिटरिंग तक

ट्रेंड विश्लेषण

एगो अकेल स्पेक्ट्रम खाली एगो स्नैपशॉट होला। वाइब्रेशन एनालिसिस के असली ताकत बा रुझान विश्लेषण — समय के साथे बदलाव के ट्रैक करे में।

  • बेसलाइन बनाईं: नया भा जानल-सही उपकरण के मापीं। स्पेक्ट्रा सेव करीं — Balanset-1A के F6 — Reports आर्काइव मेजरमेंट आ HTML रिपोर्ट स्टोर करेला।
  • अंतराल तय करीं: क्रिटिकल: साप्ताहिक। स्टैंडर्ड: मासिक। ऑक्सिलियरी: त्रैमासिक।
  • दोहरावे लायक होखे के सुनिश्चित करीं: एके प्वाइंट, एके दिशा, एके ऑपरेटिंग कंडीशन।
  • बदलाव के ट्रैक करीं: बेसलाइन से 2× बढ़ोतरी महत्वपूर्ण होला, भले ई ISO जोन A में होखे।
  • मापन रूट के इस्तेमाल करीं: Balanset-1A के F9 — Route Inspection दोहरावे लायक मेजरमेंट राउंड के मार्गदर्शन करेला आ ISO 10816-1 जोन के मुताबिक रीडिंग के ट्रेंड देखावेला।

डिसिजन एल्गोरिदम

  1. क्वालिटी स्पेक्ट्रम (F8 चार्ट, रेडियल + एक्सियल) प्राप्त करीं।
  2. सबसे ऊँच पीक के पहचानीं — इहे प्रमुख समस्या ह।
  3. फॉल्ट के प्रकार से मिलावीं:
    • 1× प्रभावी बा → अनबैलेंस → Balanset-1A से बैलेंस करीं।
    • 2× प्रभावी बा + ऊँच एक्सियल → मिसअलाइनमेंट → शाफ्ट के फेर से एलाइन करीं।
    • कई हार्मोनिक्स → लूजनेस → जाँच करीं आ कस दीं।
    • नॉन-सिंक्रोनस पीक → बेयरिंग → बदलावे के योजना बनावीं।
    • GMF + साइडबैंड → गियर → तेल जाँचीं, गियरबॉक्स के निरीक्षण करीं।
  4. पहिले प्रमुख फॉल्ट के ठीक करीं — गौण लक्षण अक्सर अपने आप गायब हो जालें।

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वाइब्रेशन एनालाइज़र + बैलेंसर

2-चैनल FFT स्पेक्ट्रम एनालाइजर, वाइब्रोमीटर, सिंगल & टू-प्लेन बैलेंसिंग, ISO 1940 टॉलरेंस — सब एक्के पोर्टेबल किट में।

Balanset-1A → Balanset-4A →